'दिनभर आँखे सँजोती है कुछ नए ख़्वाब, थमती है कुछ पल अजनबी मीठे चेहरों पर जाके सुकूं के दो पल के बाद फ... 'दिनभर आँखे सँजोती है कुछ नए ख़्वाब, थमती है कुछ पल अजनबी मीठे चेहरों पर जाके सुक...
यथार्थ से टकराती कविता... यथार्थ से टकराती कविता...