समझो उन्हें भी इंसान
समझो उन्हें भी इंसान
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वो था थोड़ा अलग सा,
ना जाने क्यों उससे कोई समझ ना सका,
दिखता तो लड़के जैसा था,
लेकिन,उसकी हरकत थी सबसे अलग।
दुनिया वालों ने उसे दिया बहुत ताने,
ना जाने क्या क्या नाम से पुकारा गया उसे
लेकिन मां बाप ने उसे समझा,
उसका साथ दिया।
था भले वो दूसरों से अलग,
लेकिन कर जाता था कुछ एसे एसे काम जो दूसरे ना कर पाए।
उठा वो खड़ा हुआ दुनिया की परवाह किए बिना खुद को बदल डाला।
हाथो में चूड़ी,माथे में बिंदी, सज धज के वो निकल पड़ा,
आज है वो उनका साथी जिनका है नहीं कोई अपना,
आज है वो उनका साथी जिनको कभी कोई न समझा अपना।
