STORYMIRROR

कुमार गौरव मिश्रा

Others

3  

कुमार गौरव मिश्रा

Others

शरद पूर्णिमा की एक रात

शरद पूर्णिमा की एक रात

1 min
389

नवरात्र की शरद बेला

और यह बिखरी चांदनी,

आए हैं महारास रचाने

बनवारी नारायणी।


पूर्ण चंद्र सोलह कला में

फैला रही जग में ज्योति,

अर्ध रात्रि की यह बेला 

लगे बड़ी मनभावनी।


भर लो गगरी अमृत से

मयंक बना है दानी,

भोर पहर जब जागोगे

मिलेगा ओस-पानी।


पियुष पाने की चाहत में

वसुंधरा खड़ी चौड़ी छाती,

कहे बाबा का नारायण-

"जाग रे दुनिया"

चाहे रंक या धनवानी। 


Rate this content
Log in