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Kavya Sagrika

Others

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रक्षाबंधन

रक्षाबंधन

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भैया, तेरी बहना आंखों में, प्यार सजाकर लायी है ।

कुमकुम, केसर, रोली, चंदन से थाल सजाकर लायी है ।।


घर की बेटी, अपने घर पर, भाई से मिलने आयी है ।

श्रृंगारित चंदन की आभा ललाट पर वरने आयी है।।


तंदुल को पाणी में रखकर, इष्टों को पूजने आयी है।

मस्तक पर तेरे तिलक लगा, आशीष लुटाने आयी है।।


रक्षा के मगंल सूत्र से तुझको रक्षित करने आयी है।

हाथों पे तेरे बांध के राखी सब दुःख हरने आयी है।।


रक्षा सूत्र से मन वीणा को झंकृत करने आयी है।

भाई बहनों के रिश्ते को अलंकृत करने आयी है।।


नारी के तीन स्वरूपों को खुद में समेट कर लाई है ।

मां, बेटी और बहन की आभा शोभित करने आयी है।।


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