Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Vvk Gautam

Others

3  

Vvk Gautam

Others

रह़म-ए-ख़ुदा

रह़म-ए-ख़ुदा

1 min
232


चौकन्ना रहती हूँ हर वक़्त मैं

तेरी हिफाज़त के लिए मौला

तू है कि अलग-थलग बटकर

अपनी दुकान लगाए बैठा है


लड़ती रहती हूँ हर दफ़ा मैं

हजारों धर्म के ठेकेदारों से ,

तू इंसानियत तन से छोड़ के

ढेरों किरदार सजाए बैठा है


पहन पोशाक आदिले आबरू की

अब सजा नेक करने की ख़्वाहिशें ,

तू है कि भूलकर उन गुनाहगारों को

मुझ पर ढेरों इल्ज़ाम लगाए बैठा है


Rate this content
Log in