पेड़-हमारे मित्र
पेड़-हमारे मित्र
प्रकृति का उपहार है ये,
देते हमें कुछ ना कुछ लगातार है ये।
प्राणवायु हमको है यह प्रदान करते,
अपनी जड़ों से मिट्टी को है थामते।
विभिन्न जगहों पर विभिन्न पेड़ करते हैं वास,
इनकी उपयोगिताएँ बनाते हैं इतने खास।
चाहें हो रंग-बिरंगे फूल या हो मीठे फल,
अपने उत्पादों से सुशोभित कर देते कोई भी स्थल।
इतना ही नहीं, यह तो पशुपक्षियों को भी देते है शरण,
अपना बनाकर करते हैं सबका पोषण।
जहाँ है यह होते, वहाँ है छा जाती हरियाली,
सुंदरता में नहीं रहता है कुछ भी खाली।
वर्षा के बादलों के होते हैं ये केंद्र,
इनके ही कारण प्रसन्न हो जाते हैं देवराज इंद्र।
करते हैं सदैव हम पर परोपकार,
परंतु क्यों करते हैं हम उन पर निरंतर अत्याचार?
पेड़ हमें हैं छाँव देते,
किंतु हम उन्हें क्यों है काट देते?
पेड़ है हर तरीके से हमारे मित्र,
हमारी भूल के कारण कहीं बन ना जाए केवल चित्र!
