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Dr. Akansha Rupa chachra

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Dr. Akansha Rupa chachra

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पायल

पायल

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नारी की सौम्यता लगती सहज तभी

सोलह श्रृंगार करके मोहक छवि सजीली"

प्राण प्रिय, मेरी सुहासिनी 

कोमल, सुप्रिय

पायल की छन -छन से दिल को लुभाती हो

बिंदिया की चमक से मकान को शांति भवन 

बनाती हो।

पायल की छनकार घर में होने से 

मोहक शालीनता छलकती है।

संस्कारों में सिमटी गृहलक्ष्मी ।

मेरी प्राण प्रिय, अर्द्धांगिनी हो।

अन्नपूर्णा, शारदा सर्वगुण संस्कारी हो।

सिर ढक कर शर्माती जब पायल छनकाती हो।

मेरे घर आँगन को स्वर्ग समान बनाती हो 



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