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"नहीं मालूम"

"नहीं मालूम"

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तेरी उदासियाँ हमको मायूस कर देती हैं
है तुझे मेरी मायूसियों की ख़बर नहीं मालूम

तुझसे लड़ते तो हैं हम हरेक बात पर
प्यार भी है तुझसे है किस कदर नहीं मालूम

हर बात कह पाते हैं तुझसे ही और तेरे सामने
हो गये कैसे अचानक बेअसर नहीं मालूम

रातें तुझसे शुरू होकर खिलखिलती रहती हैं
और क्यों है नहीं रत्ती भर भी सुबह को सबर नहीं मालूम

मेरी नींदें और तेरे ख़ूब सारे सपने इतना ही सामान है
कैसे मिल के सजाऐंगे हम अपने अरमानों का घर नहीं मालूम


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