STORYMIRROR

Arshi Naaz

Others

3  

Arshi Naaz

Others

मनुष्य

मनुष्य

1 min
173

अहिंसा का नारा लेकर निकले थे जो,

 वह स्वयं हिंसा के शिकार बन गए जो।


सिखाए थे उन्होंने जो पाठ हमें,

अब वह बस उनके विचार बन गए।


अत्याचार करना लोगों के लिए कठिन न रहा,

यह तो उनके व्यापार बन गए।


जो दबा कर चले यहां दूसरों को, 

वहीं जग में समझदार बन गए।


ईमानदार को बनाया गुलाम,

और बेईमान ही सरकार बन गए।


परंतु जिहने छोड़ा इन सब बुराइयों को,

वह मनुष्य ही तो प्रभु के चमत्कार बन गए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Arshi Naaz