मिलकर फिर से याद करेंगे
मिलकर फिर से याद करेंगे
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समय भी काफी अजीब होता है
सालों तक रुला कर
बस एक पल को चुटकी भर खुशियां देता है
कितना सुहाना था वो बचपन हमारा
ना आगे की चिन्ता थी
ना ही सर पे काम का बोझ
बस पूरे दिन खेला करते थे
और दोस्तों के फ़िज़ूल के नखरे
झेला करते थे
अब तो न जाने कितने साल हुए
दोस्तों से एक साथ मिलने को बेहाल हुए
बचपन की अब बस यादें रह गयीं
कुछ खट्टी कुछ मीठी सी
भूल गए है अब तो सारी
बदमाशियाँ जो हमने की
मिलकर फिर से याद करेंगे
ऊपर वाले से फरियाद करेंगे
साथ हो उनका सारी ज़िन्दगी
कमीने ही सही पर है तो सारे अपने ही।
