STORYMIRROR

MERE EHSAS TERI KHAMOSHI

Others

2  

MERE EHSAS TERI KHAMOSHI

Others

मेरी जिंदगी

मेरी जिंदगी

1 min
157

पल-पल इम्तिहान लेती

रही जिंदगी

राह के फूलों को भी कांटे

बनाती रही जिंदगी

कभी बैठना चाहा छाँव में

तो धूप ही धूप दिखाती

रही जिंदगी


सह लिया सब मुस्कुराहट

के साथ

फिर भी हर पल उलझाती

रही जिंदगी

कर लिया इश्क खुद से

खुद को ही मिटाती

रही जिंदगी


अंचल में खुद के चाही

मैंने सुकून की जिंदगी

उसमें भी सदा आग

बरसाती रहे जिंदगी।            

   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन