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Mrityunjai Upadhyay 'Naval'

Others

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Mrityunjai Upadhyay 'Naval'

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मेरी भाषा

मेरी भाषा

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मेरी भाषा ने

दूर देश से आए 

भाषा के शब्दों को 

दिया है स्थान अपने घर में 

बिना भेदभाव के अपनाया उनको

स्कूल, स्टेशन ,

वकालत, हुजूर 

साहब, फरमान, इमान 

आदि ...आदि... आदि....

यह शब्द बस गए मेरी भाषा में 

होकर रह गए मेरी भाषा के 

मेरी भाषा ने पैदा किए हैं 

संस्कार- सभ्यता 

शालीनता- मानवता 

मेरी भाषा ने सिखाए हैं 

सत्य -अहिंसा 

प्रेम -कर्तव्य 

मेरी भाषा ने

तय किया है सफर 

गांव की पगडंडी से लेकर

राजधानी की लंबी- चौड़ी 

काली चकाचौंध 

लाइट लगे रोड तक 

मेरी भाषा मिलाती है 

एक दूसरे को 

रेलवे लाइन की तरह 

क्योंकि 

मेरी भाषा तोड़ना नहीं 

जोड़ना जानती है।


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