STORYMIRROR

Rinki Raut

Children Stories

3  

Rinki Raut

Children Stories

मेरे गाँव की तस्वीर

मेरे गाँव की तस्वीर

1 min
298

एक गोरैया ने आवाज़ लगाई

इस कंक्रीट के जंगल में नहीं


गाँव में ज़िन्दगी आज भी है समाई

आज भी चिडियों के झुंड दिखते है 


शाम में गोधूली उड़ती है

बरगत के पेड़ के नीचे 

ज़िंदगी ले अंगड़ाई 


आकाशवाणी के बोल देती है सुनाई

सुबह की बेला में लिपा हुआ चूल्हा और अगन


बिना पढ़ाई के बोझ तले दबा बचपन

देता दिखाई 


आम, बेरी, महुआ, अमरुद को घेरे बच्चे

हवाओ में महुआ की महक

खेतो में पुरवाई की चहक

 

आज भी है गाँव में यादों की महक

बरगत के पेड़ के नीचे ज़िंदगी ले अंगड़ाई।


Rate this content
Log in