....मैं
....मैं
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अगर रख सको तो पुरानी निशानी हूँ मैं
खो दिया तो एक अधूरी कहानी हूँ मैं
रोक न पाए जिसको कोई
वो एक झरने का पानी हूँ मैं
आख से देखोगे तो ख़ुश पाओगे
अपने दिल से पूछोगे तो दर्द का पहाड़ हूं मैं
समझ ना सके उनके लिए अंजान हूँ मैं
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं
दुनिया जितना बड़ा घाव देगी हमे
उतना ही ज्यादा मुस्कुराने की आदत है हमे
समझ ना सके उनके लिए पायस हूं मैं
जो दिल से समझें उनके लिए अमृत हूं मैं
इस अनोखी दुनिया में एक खाब हूँ मैं
सवालों का अनोखा एक जवाब हूँ मैं
जो अकेले जिए उसका अंजान सफर हूं मैं
जो साथ चले सबके उसका यादगार सफ़र हूं मैं
अगर रख सको तो पुरानी निशानी हूँ मैं
खो दिया तो एक अधूरी कहानी हूँ मैं
