बेवकूफ
बेवकूफ
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शाम को कॉल और बात तेरी
अच्छी, सच्ची लगती थी उसको
जिसको तूने यूँ ही भुला दिया है
ये जाने बिना की उसका क्या हाल है
अब जमाने में लूटा जाता है
लगता है टाइम का पैसा लिया जाता है
अब प्यार बाइक और कपड़े पे होता है
लोग अब गुलाब कम, काटे ज्यादा होते है
टाइम जितना दोगे उतने अच्छे हो तुम
भरोसे की बात छोड़ो बेवकूफ बनते हो तुम
सच्चे प्यार और दोस्त के ये चोचले नहीं होते
भरोसे के लोग अपने से कभी दूर नहीं होते
सब की अंदर की बात सुन के परख लेता हूं
क्या करें इश्क करने वाले का दोस्त भी हूं
