माँ
माँ
माँ शब्दों में एक है,
पर गुणों में अनेक है l
माँ ममता की मूरत है,
भगवान की वह सुरत है।
कहते है संसार में,
भगवान ने अपनी प्रतिबिंब बनाई है
वो ना पहुंच सके सब जगह,
इसलिए उन्होंने माँ बनाई है
माँ शीतल है,
तो माँ जगदम्बा भी है ।
माँ सहनशील है,
तो माँ चंडिका भी है ।
अपने बच्चों पे आती हर कोई मुश्किल,
अपने पे ले लेती है ।
अपने बच्चों की एक मुसकुराहट के लिए,
सारी कठिनाई सह लेती है ।
माँ दयालु है,
माँ प्यार का सागर है ।
सारे दुखो को हरती है,
सारी गलतीयाँ को माफ कर देती है ।
बीमार रहते हुए भी सारे काम वो करती है,
अपनी जान दांव पे लगा कर हमें जन्म वो देती है ।
माँ ही खास सहेली है,
माँ ही पहली गुरु है ।
उंगली पकड़ कर बच्चों को माँ ही चलना सिखाती है,
सही गलत की पहचान भी तो माँ ही हमें करवाती है ।
माँ के जितना मूल्यवान कोई नहीं है,
माँ ही जीवन है, माँ ही दुनिया है ।
