लोकडाउन-मेरी व्यथा
लोकडाउन-मेरी व्यथा
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खुली हवा में,
मैं जा नहीं सकता।
कैसा ये दिन आया कि,
मैं बाहर जा भी नहीं सकता!
एक गलती कर दी हमने,
बडे से कोरोना को छोटा समझ लिया।
जल्द पहचाना नहीं कोरोना को हमने,
उस विदेशी ने ही हमें,
हमारे ही घर में कैद कर दिया!
