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Gauri Vaidya

Others

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Gauri Vaidya

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कौन हो तुम?

कौन हो तुम?

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कौन हो तुम? 

अक्सर ख़ुद से पूछा करती हूँ......


क्या कोई शायरी या कविता हो तुम?

ख़ुद में सोचा करती हूँ ....

कैसे कह दूँ, कौन हो तुम 

मेरी खुशी, मेरा मान हो तुम ....

मेरे शब्दों की दुनिया, कण-कण में बसी पवित्रता हो तुम!

मेरे दिल के कोने में छिपी, यादों का बसेरा हो तुम ....


न जाने क्या अधूरा है तुम्हारे बिना ,

मेरे शब्द, या मैं? सोचा करती हूँ ....


ख़ैर, एक बात कहूँ

कुछ तो है तुम्हारी आँखों में!

शरारत, मासूमियत या मुस्कुराहट

जो जाते- जाते ठहर जाती हूँ ....


क्या कड़ी धूप में छाँव, या

पतझड़, बसंत बहार हो तुम?

या दिए की रौशनी, दिन का उजाला हो तुम! 

आख़िर कौन हो तुम...


जो खुली आँखों से कभी देखा था 

क्या वही ख्वाब हो तुम?

हाँ, मेरे ख़्वाब ही तो हो तुम 

मेरी ज़िन्दगी का, कभी न ख़त्म होने वाला एहसास

एक प्यारे से ख़्वाब हो तुम .....

एक प्यारे से ख़्वाब हो तुम .....



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