मैं हिंदी हूं!
मैं हिंदी हूं!
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हाँ मैं हिंदी हूँ।
मीठी -मनोरम -अनूठी हूँ,
संस्कृत की बेटी हूँ ,
हिंदुत्व की पहचान हूँ,
हाँ मैं हिंदी हूँ।
सितारों सी चमकती हूँ,
हर युग की पहचान हूँ,
भारत की राजभाषा हूँ,
हाँ मैं हिंदी हूँ।
सजती और सँवरती हूँ,
कवि सूर की सागर हूँ,
भक्त मीरा की गागर हूँ,
हाँ मैं हिंदी हूँ।
निराला की कल्पना हूँ,
हरिवंश की मधुशाला हूँ,
प्रेमचंद का उपन्यास हूँ,
हाँ मैं हिंदी हूँ।
पढ़ लो अति सरल हूँ,
थोड़ी गिरती और संभलती हूँ,
खुश हूं, आज भी जिंदा हूँ,
हाँ मैं हिंदी हूँ।
