STORYMIRROR

Pawan Kumar

Others

2  

Pawan Kumar

Others

जीवन

जीवन

1 min
139

ना जीवन में कोई कसर बाकी थी

ना जीवन में कोई फिकर बाकी थी


हम तो अंजान बनकर भटका करते थे

शरीर में जब तक जान बाकी थीं,


ना जीवन रहा ना रही ख़्वाहिश है

अब तो उंगलियों पर दिन गिना करते हैं,


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन