हम अकेले रह गए
हम अकेले रह गए
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हर तमन्ना मर गई, हर ख़्वाब अपने ढह गए,
उनको मंज़िल मिल गई और हम अकेले रह गए।
जिंदगी को छोड़कर इक जिंदगी जाती रही,
हम खड़े बुत की तरह बस देखते ही रह गए।
उनको मंज़िल मिल गई और हम अकेले रह गए।।
ग़म नहीं जाने का उनके ग़म तो है इस बात का,
कर्ज़ उनके जाने कितने पास अपने रह गए।
उनको मंज़िल मिल गई और हम अकेले रह गए।।
आज जितना है कभी इतना न था बेताब दिल,
करके हम लाखों जतन दिल को मनाते रह गए।
उनको मंज़िल मिल गई और हम अकेले रह गए।।
अपने कंधों पर उठाएं लाश अपनी कब तलक,
सोच में डूबे हुए "जय" सोचते ही रह गए ।
उनको मंज़िल मिल गई और हम अकेले रह गए।।
