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Anshu Khare

Others

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Anshu Khare

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हाँ, मैने जीना सीखा है

हाँ, मैने जीना सीखा है

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हाँ, मैने जीना सीखा है,

आगे बढ़ के पीछे ना मुड़ना सीखा है,

टूट कर खुदो को जोड़ना सीखा है,

हाँ, मैंने जीना सीखा है|


ठोकरें तो बहुत लगी,

उनके ज़ख्म भी अब तक है हरे,

बार बार गिर कर उठना सीखा है,

हाँ, मैंने जीना सीखा है|


क्या है, क्या नहीं,

ज़िंदगी तो है बस यही,

हर ग़म को पी कर खुश होना सीखा है,

हाँ, मैंने जीना सीखा है|


देखा है लोगों को बदलते हुए,

साथ छोड़े न जो, उनको दूर जाते देखा है,

बीते उन लम्हों में मुस्कुराना सीखा है,

हाँ, मैंने जीना सीखा है|


ज़िंदगी की इस दौड़ में,

पकड़ते हुए यह तेज़ रफ़्तार,

कितने सपने हुए मुक़म्मल,

कितने हुए ज़ार ज़ार,

डगमगाते हुए उन क़दमों को,

यूँही संभालना सीखा है,

हाँ, मैंने जीना सीखा है |


बहुत कुछ पाया,

कितना कुछ खोया भी,

मंज़िलों के पीछे भागते हुए,

ढूंढा मैंने खुद को ही,

ख़्वाहिशो को जेब में रख कर,

ख़्वाब देखना सीखा है,

हाँ, मैंने जीना सीखा है|


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