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Madhurima chandra

Others

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Madhurima chandra

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घावों की चीखें नहीं होती

घावों की चीखें नहीं होती

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घावों की चीखें नहीं होती

होता है तो बस आर्तनाद

घावों में विस्फोट नहीं होता

होता है पीड़ा का मौन रिसाव  

मान अपमान आघात प्रत्याघात 

के बही खातों में बंद है 

उपेक्षा अपेक्षा के 

मूक हिसाब किताब 

ठीक वैसे ही 

दमघोंटू से कमरे में जैसे

घुटी पड़ी रहती है ऑफिस की फाइलें

धूल से सनी जालों में लिपटी 

अपना असल रूपरंग भूल चुकी 

ज़ंग खाती अलमारियों में सालोँ से बंद

बिसरी हुई कहानी बन 

मन ही मन लीन है जो

अव्यक्त अनथक प्रतीक्षा में 

जाने किस मसीहा की!


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