अनुभूतियों के स्पर्श से जिन शब्दों का मन में प्रस्फुटन होता है उन्हें लेखनी की लय में प्रवाह कर देती हूं ..बस !!
विध्वंस.. विध्वंस कहाँ होता है वो तो होता है मौन हाहाकार। विध्वंस.. विध्वंस कहाँ होता है वो तो होता है मौन हाहाकार।
घावों की चीखें नहीं होती होता है तो बस आर्तनाद। घावों की चीखें नहीं होती होता है तो बस आर्तनाद।