दुनिया की सच्चाई
दुनिया की सच्चाई
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प्यार, मोहब्बत, इश्क़ की बातें नहीं सुनाने आया हूं,
इस कविता में, मैं दुनिया की सच्चाई बताया हूं
मानवता सारी खत्म हो रही इस सुन्दर संसार से,
बेटा आजकल बिगड़ रहें है , मां बाप के प्यार से ,
कैसे गजब करते हैं, बातें कैसे जीवन जी पाते है
मां बाप को छोड़कर बेटे अलग घर बसाते है
अपने सुख- शांति के खातिर , कैसे जुर्म ये करते है
जो था आंख का टुकड़ा भाई, उसे देख अब जलते है
जिस बेटा के खातिर मां हरदम दुख उठाती थी
जिसको भूख लगने पर मां स्तन से दूध पिलाती थी
अंतर तो है साफ झलकता है उसके व्यवहार में,
वो बेटा भी बदल गया इक नई दुल्हन के प्यार में ॥
