Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

दिसंबर

दिसंबर

1 min
258


दो साल का दिसंबर बीत गया 

वक़्त बचपन का प्रीत लील गया

मुखड़ा देख वो हँसती थी 

हँसता उसको देख मन मुस्काता था 

छम छम की धुन पर आंगन वो गुनगुनाता था 

सर्द हवा समेट उसे दूर ले गया 

दो साल का दिसम्बर बीत गया 

वक़्त बचपन का प्रीत लील गया

शामें उजली होती थी 

घर में किलकारी गूंजती थी 

खन खन चूड़ियाँ घर में सरगम लाता था 

बुझता सूरज समेट उसे दूर ले गया 

दो साल का दिसम्बर बीत गया 

वक़्त बचपन का प्रीत लील गया

पलकों पर इंतज़ार बसता था 

जीवन के रंगों का सार मिलता था 

आंचल उड़ उड़ के स्नेह रंग बरसाता था 

सब रंग समेट रात रंग स्याह दे गया 

दो साल का दिसम्बर बीत गया 

वक़्त बचपन का प्रीत लील गया




Rate this content
Log in