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Shwetank Singh

Others

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Shwetank Singh

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दिल्ली में धुंध

दिल्ली में धुंध

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मैं चाहता हूँ

तुम्हें ढक लेना,

तुम्हें अंदर से

जिंदा रखने के लिए

जरूरी है

इन हवाओं से

पूरी तरह महफूज रखना

जिनकी रंगतों के लोभ में

तुम दिल्ली चले आए थे।

खेतों से जो ऑक्सीजन

ठूँसकर लाए थे फेफड़ों में

अब वो

दुकानों में मिलने लगी है

वोटों का बाजार

सजता तो बहुत दूर था

पर उनके बिकने की छाप

यहाँ साफ दिखने लगी है।



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