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Gaurang Rajeshbhai Chudasama

Others

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Gaurang Rajeshbhai Chudasama

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ढल गए

ढल गए

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बचपन में खेलना सीखा तो खेल से ढल गए

मोहल्ले में दोस्त मिले तो मोहल्ले वाले दोस्त के साथ ढल गए

हाथ में किताब आयी तो किताबों के साथ ढल गए

पहले पेंसिल से लिखा करते थे जब पैन आयी तो पैन के साथ ढल गए

Higher study में आए तो पढ़ाई बढ़ गई तो पढ़ाई के साथ ढल गए

जवान हुए तो जवानी के साथ ढल गए

कॉलेज में आए तो कॉलेज के वातावरण के साथ ढल गए

पढ़ाई खत्म करके नौकरी लगी तो नौकरी के साथ ढल गए

जीवन साथी के साथ शादी होते ही उनके साथ ढल गए

बच्चे हुए तो बच्चों की परवरिश में ढल गए

बुढ़ापा आया तो बुढ़ापे के साथ ढल गए

ऐसे ही पूरी जिंदगी दुनिया के साथ ढलते ढलते एक दिन खुद ही ढल गए।



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