चमक
चमक
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रात को चमकते जुगनू से मैंने पूछा,
"कहां से इतनी चमक लाते हो...?
आते जाते मन को जो लुभा जाते हो..!!
कहां से इतनी चमक आती है तुममें
घोर तम में भी जो जगमगा जाते हो!!"
जुगनू ने कहा
ऐ इंसान!!
चमकता तो तू भी बहुत है
इस अंधेरी काली रात में...
अपने गम और आंसू को छिपाकर जब तू
उजियाले की तरफ़ विश्वास से बढ़ जाता है
तब तेरा चेहरा भी
सफलता और आत्मविश्वास से जगमगा जाता है!!!
फर्क बस इतना सा हैं
मैं जन्मों से चमकता हूँ
और तू कर्मों से चमकता है।।।।।
