Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

बेदर्द दुनिया

बेदर्द दुनिया

1 min
447


बेदर्द दुनिया में,

दर्द को अपना मान बैठा।

अपना समझ कर,

गैरों को गले लगा बैठा।

न मिला चाहत को

कोई गुलाब अगर,

तो दर्द भरे चीखते कांटों को

अपने गले लगा बैठा।

न मिला रोशनी में

कोई हमसफ़र ,

तो अंधेरों में जगमगाते

जुगनू को अपना

हमराही बना बैठा।

न मिला खुदा अगर

किसी मंदिर या मस्जिद में

तो राह पड़े

किसी पत्थर को पूज

उसे अपना रब मान बैठा।


Rate this content
Log in