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Manmohan Kasana

Others

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Manmohan Kasana

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बदलाव

बदलाव

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बदल गई

तस्‍वीर देखो-बदल गई कानों की बाली,

देखो कर रहे हैंघर-हैंघर

कुत्‍तो की कुत्‍ते रखवाली,

बदली तस्‍वीर देखो..........

बदल गई कोठों की दुनिया,

क्‍या-क्या करती हैं,

इनमें रहने वाली लालियाँ,

चमकने वाली

रंगबिरंगी चम-चम करती लाईटों में देखो.........

ब्रा और चड्डी को तन से ढक कर रही हैं देखो....

बोतल पर बोतल बीयर व रम की खाली।

बदल गये हैं देखो-लैला-मजनूं,

छोड-छोड़ कर एक दूसरे कोहर रोज़ बदलते हैं मोहब्‍बत की कहानियां,

और बदलते हैं टाईमपास करने वाली, वाले

बदल-बदल कर रहे हैं देखो....

समाज के मुहं को काला,

क्‍योंकि उन नादानों ने क्‍या बिगाडा था इनका

जिन्‍हें छोड जाते हैं पैदा होते ही फुटपाथ पर,

बदल गई देखो भारत की लाली...............

बदली है देखो राम-राम घरवालों को कहते बाय-बाय

और परायों को कहते हाय-हाय,

देखो-देखो सबकुछ देखो बदल गई है दुनिया सारी....  

बदली दीवार की तस्‍वीर देखो,

और तो और

इस बदलाव में बदली तकदीर हमारी,

करते हैं फैसला देखो-ढोंगी, बाबा, मुल्‍ला और काज़ी, जिनके साथ में अनपढ़ नेताजी ।

देखो-देखो बदलाव।


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