"ऐ वतन की माटी क्या मैं तेरे काम आ पाऊंगा"
"ऐ वतन की माटी क्या मैं तेरे काम आ पाऊंगा"
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ऐ वतन की माटी क्या मैं तेरे काम आ पाऊंगा
सीमा पर तैनात होकर क्या तेरी सेवा कर पाऊंगा
सैनिक की तरह वीरता क्या मैं भी दिखला पाऊंगा
दुश्मन की सरजमी पर क्या भारत माता का तिंरगा लहरा पाऊंगा
सियाचिन की धरा पर क्या मैं अपना रक्त बहा पाऊंगा
ऐ वतन की माटी क्या मैं तेरे काम आ पाऊंगा
युद्ध मैं बलिदान देकर क्या मैं शाहिद कहलाऊगा
मौत से पहले क्या मैं तुझकों सलाम कर पाऊंगा
तिरंगे मैं लिपटेकर क्या मैं घर को जा पाऊंगा
देश के गोरव रक्षा क्या मैं कर पाऊंगा
ऐ वतन की माटी क्या मैं तेरे काम आ पाऊंगा।
