आखिरी प्यार
आखिरी प्यार
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जो दिल से धड़कन को समझे वह प्यार है
जब दूर हो तड़पन समझे वह प्यार है
प्यार पाने के लिए हार मानते नहीं
कोशिश करते हैं बार-बार क्त वह प्यार है
जो दिल को दिल से न समझे वो प्यार ही क्या
रहतेे हैं उलझे उलझे वह प्यार ही क्या
प्याार की परिभाषा सब जानते हैं नहीं
जो सब लोग समझ ले वह प्यार ही क्या
कुछ समझते हैं प्यार बड़ा ही कठोर है
पर बिछड़े हुए दो दिलोंं का यही जोड़ है
पहले प्यार में जो होता था आज होता ना वो
पहलेे कुछ और था आज कुछ और है।
