आज़ादी
आज़ादी
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आज़ादी, आज़ादी, देश की आज़ादी,
वीर बहादुर, स्वतंत्रता सेनानियों ने दीं।
सभी लड़े डटकर,
आए वापस जीतकर,
आज तक उन्हें भूल ना पायें,
आज भी उनपर फूल चढ़ायें।
१९४७ में हमें स्वतंत्रता दिलायी,
पर क्या आज हम आज़ादी से जीं पायें?
कहीं पर दंगा, कहीं पर फ़साद,
जी रहे हैं हम, धरे हाथ पर हाथ।
जगह जगह पर है अत्याचारों का नाम,
क्या ज़ुल्म सहना है हमारा काम?
कहीं नारी का अपमान,
कहीं माँ का अपमान,
तो कहीं अहिंसा का बलिदान,
क्या यही है हमारी पहचान?
क्या नष्ट हो गए हैं मर्यादा और मान,
क्यों नहीं कर रहे हैं धरती का सम्मान?
नहीं रही अब हमारे देश की वो आन, बान और शान,
क्या इसी आज़ादी के लिए वीरों ने दी जान?
