नमस्कार पाठकों मैं अश्वी, एख युवा लेखक। मैं हिंदी में कहानियाँ और कविताएं लिखती हुं।
होते हैं कुछ लोग ऐसे, जो जीते हैं कल्पना और यथार्थ को साथ लेकर, कुछ न मांगकर – केवल देकर। होते हैं कुछ लोग ऐसे, जो जीते हैं कल्पना और यथार्थ को साथ लेकर, कुछ न मांगकर – क...
आज मैं आ खड़ा हुआ आईने के सामने। वो भी आ गया मेरे ही समक्ष। आज मैं आ खड़ा हुआ आईने के सामने। वो भी आ गया मेरे ही समक्ष।
जब युद्ध होते हैं, रणभूमि में। आदमी-आदमी में। धन के लिए, भूमि के लिए। वे युद्ध शुरू होते हैं, खत्म ह... जब युद्ध होते हैं, रणभूमि में। आदमी-आदमी में। धन के लिए, भूमि के लिए। वे युद्ध श...