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क्या करती मैं और , माँ- बाप के लिए थी पराई, कौन करता मेरे दुखों पर ग़ौर , क्या करती मैं और , माँ- बाप के लिए थी पराई, कौन करता मेरे दुखों पर ग़ौर ,
तुम्हे तुम्हारे भगवान अपने अंदर ही मिल जाएंगे || तुम्हे तुम्हारे भगवान अपने अंदर ही मिल जाएंगे ||
गले मिलने की हैसियत नहीं है मेरी, बस चाहत है इतनी की आपके, चरणों में शरण मिल जाए मुझे...! गले मिलने की हैसियत नहीं है मेरी, बस चाहत है इतनी की आपके, चरणों में शरण मिल जाए...