माध्यमिक शिक्षा सेवा में टी जी टी शिक्षक।हिंदी परास्नातक।गीत,दोहे,ग़ज़ल,समीक्षा का निरन्तर लेखन और प्रकाशन। अभी तक तीन पुस्तकें प्रकाशित और दो संपादित।
मुड़ा-तुड़ा कागज हुआ, सूरज का विश्वास बादल भी लिखने लगे , बुझी अनबुझी प्यास।। मुड़ा-तुड़ा कागज हुआ, सूरज का विश्वास बादल भी लिखने लगे , बुझी अनबुझी प्यास।।
हर झगड़े में शामिल हूँ पर मैं कोई हथियार नहीं हूँ। हर झगड़े में शामिल हूँ पर मैं कोई हथियार नहीं हूँ।
षड्यंत्रों की नकदी जारी सुख की अभी उधारी है। षड्यंत्रों की नकदी जारी सुख की अभी उधारी है।
केवल कहने को साँसों का समझ गई संकेत। केवल कहने को साँसों का समझ गई संकेत।
वृत्यनुप्रास अलंकार के ध्येय से रचित गीतिका। वृत्यनुप्रास अलंकार के ध्येय से रचित गीतिका।