"मस्तमौला"
हर पापी, हर अत्याचारी अब जान चुका है, कि वह अब मिटने वाला है। हर पापी, हर अत्याचारी अब जान चुका है, कि वह अब मिटने वाला है।
फिर सोचा, क्या जाएगा? चखने में एक बार, शायद रुतबा भी बढ़ जाएगा। फिर सोचा, क्या जाएगा? चखने में एक बार, शायद रुतबा भी बढ़ जाएगा।
काश! मैं मिट्टी होता! वायु में बिना पंख उड़ जाता। काश! मैं मिट्टी होता! वायु में बिना पंख उड़ जाता।