“जाएँ तो जाएँ किधर, मैं और मेरी आवारगी”
वर्तमान को प्रभावित करती अतीत की परछाइयाँ। वर्तमान को प्रभावित करती अतीत की परछाइयाँ।
मैं कोई सिरमौर नहीं हूँ, बस भीड़ का हिस्सा ही तो हूँ। मैं कोई सिरमौर नहीं हूँ, बस भीड़ का हिस्सा ही तो हूँ।
शैय्या पर शव होगा, तब भी उत्कृष्ट रहूँगा क्या ? शैय्या पर शव होगा, तब भी उत्कृष्ट रहूँगा क्या ?
समझ यही पाता हूँ कि सब उसी प्रकार अंधी दौड़ में लिप्त हैं समझ यही पाता हूँ कि सब उसी प्रकार अंधी दौड़ में लिप्त हैं
हर सदस्य के बेहद करीब होते हुए भी उसको एक दिन इन सबसे दूर जाना ही था। समाज की रीत हर सदस्य के बेहद करीब होते हुए भी उसको एक दिन इन सबसे दूर जाना ही था। समाज...
था प्रसन्न जीव प्रत्येक हुआ राम का राज्याभिषेक। था प्रसन्न जीव प्रत्येक हुआ राम का राज्याभिषेक।
परन्तु विधि को बैठना कहाँ पसंद है एक नया लक्ष्य अपने समक्ष मनुष्य फिरसे पाता है। परन्तु विधि को बैठना कहाँ पसंद है एक नया लक्ष्य अपने समक्ष मनुष्य फिरसे प...
बस फिर... विस्मृत हो जाता है अंतर्मन में व्याप्त गीता की सीख, मद में चूर, अनसुनी कर बैठता ... बस फिर... विस्मृत हो जाता है अंतर्मन में व्याप्त गीता की सीख, मद में चूर,...
कविता मनुष्य के स्वभाव को दर्शाती है कि जीत हासिल करने के लोभ में वह किस हद तक अंधा हो जाता है। कविता मनुष्य के स्वभाव को दर्शाती है कि जीत हासिल करने के लोभ में वह किस हद तक अ...
एक अलख जाग उठती हृदय में जिसको संजोता वह हर समय में। एक अलख जाग उठती हृदय में जिसको संजोता वह हर समय में।