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ज़िन्दगी की वीरानियों में
ज़िन्दगी की वीरानियों में
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© Raman Sharma

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ज़िंदगी की वीरानियों में तुम्हारी याद आने लागी ----
दिल ख़ामोश हुआ और चेहरे पर निराशा आने लगी,
*

ख़ुद को सँभालना होने लगा है मुश्क़िल अब -----
साँसो में भी अब अजीब सी हलचल होने लगी ,
*

दिल में भी दर्द महसूस होने लगा है ---
मन शांत और आँखें भी आँसू बहाने लगी ,
*

महसूस हुआ दिल की धड़कनेंं कुछ कह रहीं हैं -----
कहीं तुम इस पागल आशिक को चाहने तो नहीं लगी ,

----- रमन शर्मा ।

raman sharma

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