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GAURI SINGH

Others

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GAURI SINGH

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सफेद खून भाग 2

सफेद खून भाग 2

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(यह कहानी एक सच्ची घटना है)

पिछली कहानी में आपने पढ़ा था की मेरे पिताजी ने मेरी साइकिल को बेच कर अपने पीने का इंतजाम कर लिया था, 

उसके बाद_____

एक शाम को उन्होंने इतनी पी ली थी, उसके बाद मां ने जब पिताजी को और पीने से रोका तो पिता जी ने मां समेत हम तीनो भाई बहनों को घर से निकाल दिया था, मेरे घर के सामने एक स्कूल हुआ करता था, मेरे पिताजी एक ऑटो ड्राइवर थे, वो 1 दिन कमाते और 4 दिन घर पर ही रहते थे, इस लिए घर का गुजारा मुश्किल होता था, 

तभी मेरी मां ने सोचा कि के क्यू ना मैं स्कूल के बच्चो के लिए समोसे और ब्रेड पकोड़े बेचना शुरू कर दू, मेरी मां समोसे और ब्रेड पकोड़े बना कर स्कूल की छुट्टी के टाइम बच्चो को बेचा करती थी, बच्चो को समोसे बेच कर जो पैसे मिलते उस से घर का 1 टाइम का खाना बन जाया करता था, हम उतने पैसे से भी खुश थे, एक दिन फिर पिताजी के पास पैसे खत्म हो गए, 

और जो मां ने समोसे बेच के पैसे इकठ्ठे किए थे वो जबरदस्ती हाथ से खीच कर ले गए, मेरी मां ने बहुत मना किया की हमारे बच्चे स्कूल से आयेंगे तो मैं उन्हे क्या खिलाऊंगी, लेकिन पिताजी कहा सुनने वाले थे, वो बाजार से अपना सामान ले आए और घर मे अपने आप को बंद कर लिया, और कहा मुझे कोई परेशान न करे, 

जब मैं स्कूल से वापस घर आई तो मैंने मां से कहा मां बहुत भूख लगी है कुछ खाने को दो ना, तब मेरी मां रोने लगी, सुबह से रात हो गई और हम सब, मां, और भाई बहन घर के बाहर भूखे प्यासे बैठे रहे, की कब पिताजी दरवाजा खोले और हम सब अंदर जाए, लेकिन पिताजी ने दरवाजा नही खोला, मां पास ही के एक आदमी के पास रोती हुई, अक्सर हमारे रिश्तेदारों का फोन उन्ही के पास आया करता था, मेरी मां ने उनको बोला की मेरी मां को फोन लगा दो, मुझे अपनी मां से बात करनी है, और दोपहर के समय मेरी नानी हमारे घर आ गई, हम अपनी नानी को देख के सब रोने लगे और नानी ने हम सब को आश्वासन दिया की घबराओ नही सब ठीक हो जायेगा,

 उन्होंने घर का दरवाजा जोर जोर से खटखटाया और दरवाजा खुलवा दिया, मेरी नानी अपने साथ राशन का कुछ सामान भी लाई थी, उन्होंने खाने का सामान मेरी मां को दिया और कहा की खाना बना कर बच्चो को खिला दे, हम सब बच्चे ये देख रहे थे और महसूस कर रहे थे, की जीवन में कितनी कठिनाइयां है, लेकिन मेरी मां फिर भी अपनी जिम्मेदारियां बड़ी बखूबी निभा रही थी, बाद में हम सब ने मिलकर 2 दिन बाद खाना खाया, 

मेरे पिताजी जब बिना पिए रहते थे तो ठीक रहते थे, लेकिन पीने के बाद पता नही उन्हे क्या हो जाता था, एक दिन मेरे पिताजी का मूड बहुत अच्छा था, जब वो वापस काम से लौटे तो हमारे लिए चाउमिन लेके आए, हम सबने बड़ी हैरानी से उनकी तरफ देखा और पिताजी से लिपट गए, उसी शाम मेरे पिता जी के दोस्त घर आए,

पिताजी के दोस्त ने कहा की चल कही बाहर घूम आते हैं।

मेरे पिताजी ने कहा की चल काफी दिन हो गए बाहर घूमे हुए, और वो भी साथ चल दिए,

मेरी मां ने पिताजी से जाते जाते पूछा की आज रात को खाने में क्या खाओगे

पिता जी बोले आज रात को खाने में नमकीन चावल बना लेना, उसमे गोभी, मटर, आलू और सोयाबीन डाल देना, मेरे पिताजी को पुलाव खाना बहुत पसंद था, मेरी मां खुशी खुशी चावल बनाने मे लग गई, और हम भाई बहन ने खूब मजे से खाना खा लिया, फिर मां ने बोला बच्चो तुम सो जाओ, तुम्हे स्कूल भी जाना है,

हमने मां से पूछा की पिताजी कब आयेंगे, तो मां ने कहा पता नही कब तक आयेंगे, पर तुम सो जाओ, हम सब सो गए, मेरी मां पिताजी का इंतजार करती रही और घड़ी के तरफ देखा तो रात के 2 बज चुके थे, इंतजार करते करते उनकी भी आंख लग गई, 

सुबह जब हम स्कूल के लिए उठे तो मां से पूछा की पिताजी अभी तक नही आए, तब मां भी परेशान थी, वो बोली मैं भी उन्ही का इंतजार कर रही हू, फिर हम सब स्कूल चले गए, मां ने पीछे से समोसे और ब्रेड पकोड़े तैयार कर लिए, स्कूल की छुट्टी का समय होने ही वाला था, तो पास मे जो अंकल रहते थे, वो मां के पास आए और बोले की भाभी जी आपको मेरे साथ कही चलना होगा, मेरी मां ने कहा की कहा जाना है, तब उन्होंने कुछ नही बताया, तब मां बोली के अभी तो बच्चे भी स्कूल से नही आए, 

तब अंकल बोले की कोई नही हम बच्चो को स्कूल से ही साथ ले लेंगे, मेरी मां ने जो समोसे और ब्रेड बनाए थे, वो वैसे ही छोड़ कर अंकल के साथ चली गई, अंकल ने मुझे स्कूल से लिया और फिर दूसरे स्कूल से बहन को लिया और हम ऑटो से चल दिए, उन्होंने ऑटो को एक पुलिस स्टेशन के आगे रोक दिया, मेरी मां बड़ी हैरानी से अंकल से पूछती है की भाई साहब पुलिस स्टेशन हमे क्यू लाए हो, तब वो अंकल रोने लगे, और कहने लगे, की भाई साहब अब, मेरी मां बोली की क्या भाई साहब अब, वो खुद ही अंदर चली गई और हम तीनो भाई बहन बाहर ऑटो में ही बैठे थे, 

थोड़ी देर में अपने सभी रिश्तेदारों को एक साथ वहा देख कर हम बड़े हैरान हुए, थोड़ी देर में मेरी मां रोते बिलखते हुए अपनी चूड़ियां तोड़ती हुई पुलिस स्टेशन से बाहर आती दिखी।

हमने पूछा क्या हुआ मां, तब मां बोली तुम्हारे पिताजी अब इस दुनिया में नही रहे, पुलिस वालो ने बताया उनका देहांत ज्यादा पीने की वजह से हुआ है, उनका लीवर फेल हो गया था, और वो रास्ते में लावारिस की तरह पड़े थे,

बाकी आगे की कहानी भाग 3 में पढ़ें।


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