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Charumati Ramdas

Children Stories Fantasy


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Charumati Ramdas

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सुनहरे बालों वाला ततमबाय

सुनहरे बालों वाला ततमबाय

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पुराने ज़माने में एक ग़रीब आदमी रहता था। उसके नौ लड़के और एक लड़की थी। बड़े भाईयों में कोई ख़ास बात नहीं थी, मगर छोटे बेटे के बाल सुनहरे थे। उसका नाम था ततमबाय। उनके पास सिर्फ एक घोड़ी थी। वह हर साल बियाती थी, मगर हर बार आसमान से एक काला बादल नीचे उतरता और बछड़े को चुरा लेता। भाई बारी-बारी से पहरा देते, मगर कुछ भी नहीं कर सकते थे।

अब ततमबाय की बछड़े की रखवाली करने की बारी आई। वह घोड़ी के पीछे-पीछे स्तेपी में गया और इंतज़ार करने लगा कि कब काला बादल आता है। सुबह-सुबह ततमबाय ऊँघने लगा, मगर शोर से उसकी नींद खुल गई : आसमान से काला बादल उतर रहा था। ततमबाय ने इस बादल पर गोली चलाई। बादल थरथराया, और उसमें से कोई चीज़ ज़मीन पर गिरी। यह किसी औरत की उंगली थी। जब ततमबाय घर वापस आया, तो उसने देखा कि बहन की एक उंगली ग़ायब है। ततमबाय ने ऐसा दिखाया, जैसे उसने कुछ देखा ही नहीं है, मगर जब भाई आये, तो उसने उनसे कहा, कि उनकी बहन जादूगरनी है। भाईयों ने विश्वास नहीं किया और छोटे भाई को घर से बाहर निकाल दिया।

ततमबाय पड़ोस के ख़ान की खानत (सल्तनत) में चला गया और वहाँ चरवाहे की नौकरी करने लगा। हर बार जब वह रेवड़ को नदी की ओर पानी पिलाने ले जाता, तो वहाँ ख़ान की लड़कियाँ तैरती हुई दिखाई देतीं। ऐसा कई बार हुआ। छोटी लड़की ने सुनहरे बालों वाले चरवाहे को देखा और उसे उससे प्यार हो गया।       

बड़ी लड़कियों की अमीर और कुलीन लड़कों से शादियाँ हुईं। उनके बाप को उनके लिये काफ़ी दहेज़ मिला। छोटी लड़की ने अपने लिये चरवाहे को चुना, मगर बाप राज़ी नहीं हुआ। लड़की ने बाप की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी कर ली और उसे बाप से कुछ भी नहीं मिला: जो पहने थी, उन्हीं कपडों में वह चल पड़ी।

ततमबाय बीबी के साथ रहने लगा, एक साल बीत गया, दूसरा भी बीत गया। खान अपने ग़रीब दामाद की शक्ल भी नहीं देखना चाहता। मगर एक बार खान बीमार पड़ा। मुल्क के हर कोने में जानकारों और जादूगरों के लिये आदमी भेजे गये। कई सारे लोग आये। दिन और रात वे जादू करते और बूझा करते, मगर कुछ भी न कर सके – खान की तबियत सुधर ही नहीं रही थी। आख़िरकार उनमें से एक ने खान से कहा कि अगर वह जंगली बकरी का मांस खाये तो अच्छा हो जायेगा। खान ने अपनी चहेती लड़कियों और उनके शौहरों को बुलाया और उनसे कहा कि वे उसके लिये जंगली बकरी का मांस लेकर आयें। दामाद शिकार पर निकल पड़े। ततमबाय ने भी उनके साथ जाने की इजाज़त मांगी, मगर खान ने उसकी हंसी उड़ाई। ततमबाय ने अपनी प्रार्थना दुहराई, और खान ने उसे घोड़ा दिया, मगर वह बेहद कमज़ोर था।

ततमबाय ने जल्दी ही कई बकरियाँ मार डालीं, मगर खान के दामादों ने एक भी नहीं मारी। उन्हें शर्म आ रही थी, और वे ततमबाय से विनती करने लगे कि वह बकरियाँ उन्हें दे दे। ततमबाय राज़ी हो गया, मगर एक शर्त पर : वह हर एक की कमीज़ के नीचे एक निशान बनायेगा। वे राज़ी हो गये।

शिकारी महल में लौटे। खान बहुत ख़ुश था। माँस पकाया गया और उसे खान को खिलाया गया। वह जल्दी ही अच्छा हो गया। प्यारे दामादों को इनाम दिये गये।

एक बार खान ने फिर अपने प्रिय दामादों को बुलाया और उनसे कहा:

“मेरी पाँच लड़कियाँ थीं, और सिर्फ तीन बची हैं, दो लड़कियों को भयानक राक्षस – द्याऊ - चुरा कर ले गये। मैं आपसे विनती करता हूँ कि उन्हें ढूँढ़ कर आज़ाद करो। इसके लिये आपको अपनी पूरी दौलत दूँगा।

खान के चहेते दामाद खान की विनती पूरी करने के लिये तैयार हो गये और द्याऊ को ढूँढ़ने निकल पड़े। ततमबाय भी उनसे पीछे न रहा। वे काफ़ी समय तक रेगिस्तानों में चलते रहे, थक गये और आराम करने लगे। ततमबाय ने इन कठिनाईयों को आसानी से झेल लिया, वह राह में रुका नहीं, और आगे चलता रहा।

ततमबाय जा रहा है और देखता है कि एक जगह पर पाँच सफ़ेद झोंपड़ियाँ खड़ी हैं। ततमबाय उनके नज़दीक गया और रुका। वह पहली झोंपड़ी में गया और देखा : एक औरत बैठी है। उसने ततमबाय से पूछा कि वह कौन है और कहाँ से आया है? ततमबाय ने उसे पूरी बात बताई। तब उस औरत ने कहा कि वह खान की बेटी है और उसकी बहन बगल वाली झोंपड़ी में रहती है। जल्दी ही द्याऊ लौटे और ततमबाय से युद्ध करने लगे। वे काफ़ी देर युद्ध करते रहे, आख़िरकार ततमबाय ने द्याऊ को मार डाला। बहनों ने अपने रक्षक को धन्यवाद दिया। इसके बाद वे ततमबाय के साथ चल पड़ीं बाप के पास।

वापसी के रास्ते में थके-हारे, भूखे खान के चहेते दामाद ततमबाय से मिले। ततमबाय ने उन्हें खाना खिलाया और उन्हें आराम करने के लिये बुलाया। वे राज़ी हो गये। मगर जब ततमबाय जागा, तो देखा कि खान के दामाद औरतों को लेकर आगे निकल चुके हैं, जिससे खान से वादा की हुई दौलत पा सकें।

खान ने अपना वादा पूरा किया। वह बेटियों के लौटने से बेहद ख़ुश था, उसने दावत दी, अपने दामादों को सारी दौलत दे दी। ततमबाय के बारे में दामादों ने कहा कि वह रास्ते में मर गया।

दावत चालीस दिनों तक चलती रही, और आख़िरी दिन ततमबाय आ पहुँचा। उसने खान को बताया कि कैसे उसने जंगली बकरियों को और द्याऊ को मारा था और उसके चहेतों ने कुछ भी नहीं किया था। खान को यकीन नहीं हुआ। तब ततमबाय ने उसके चहेतों को शेखीमार कहा और खान से विनती की कि वह उन्हें अपने कपड़े उतारने पर मजबूर करे और कमीज़ के नीचे बनाये गये निशान को देखे। खान ने ऐसा ही किया। और जब उसे ततमबाय की सच्चाई पर यकीन हो गया तो उसने धोखेबाज़ों को अपने से दूर भगा दिया और पूरी जायदाद ततमबाय को दे दी।


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