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Chandrashekhar Jambhulkar

Others

1.5  

Chandrashekhar Jambhulkar

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सुना है कर्ज माफ़ हो जाता है ।

सुना है कर्ज माफ़ हो जाता है ।

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बात उस समय की है, जब मैं इलाहाबाद बैंक की अमदरा शाखा, जिला सतना में शाखा प्रबंधक के रुप में कार्यरत था। सामान्य तौर की तरह ही, उस दिन भी, मैं और सीताराम फील्ड पर निकले थे। एक लंबी चौड़ी लिस्ट हाथ में थामे, सीताराम ने मुझसे पूछा, सर, आज किधर चलना है? सीताराम, आज एनपीए रिकवरी करनी है। आज हम घुनवारा गाँव चलते है। सीताराम ने हाँ मे सिर हिलाते, अपनी बाइक को किक मारी और हम घुनवारा की तरफ निकल गए। शुक्ला जी, छब्बेलाल, सुनीता ऐसे करते-करते दिन के 04 बज गए। अब बारी थी रामखिलावन की, सो हम उसकी खोज मे निकल गए। पूछते-पूछते सीताराम ने उसी गाँव की एक महिला से रामखिलावन के घर के बारे मे पूछा। छाया बाई नाम था, उस महिला का। पता पूछ कर, कुछ अन्य विषयों पर बातें होने लगी। मुझे पता चला की, अभी एक महीने पहले ही छाया बाई के पति का देहान्त हो गया है। छाया बाई ने सीताराम को बताया कि खेत का मालिकाना हक अब उसे मिल गया है। अनपढ़, इस महिला ने हमे बैंक वाला पाकर, कृषि कर्ज की पूछताछ शुरू कर दी। साहब, मुझे कृषि कर्ज मिल जाएगा क्या? मज़ाक करते हुये, सीताराम ने कहा, क्यों कर्जा लेती हो? काफी पैसा है तुम्हारे पास, अकेली ही हो, किसी को ठेके पर खेत देके आराम से जिंदगी जियो। क्यूँ, इतनी मेहनत करती हो? छाया बाई चुप थी। उसने धीरे से सीताराम को इशारा किया और थोड़ा दूर ले जाके, उससे बात की। उनकी बातें तो ख़त्म हो गई, पर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने सीताराम से पूछा। क्यों सीताराम, क्या कह रही थी वो महिला? क्यों चाहिए उसे कर्ज? सिताराम बोला, साहब, वो कह रही थी, खेती तो मुझे करनी नहीं है और ना ही मुझे पैसे की जरूरत है, पर सुना है कृषि कर्ज ले लेना चाहिए, खेती के लिए लिया गया कर्ज माफ़ हो जाता है।


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