माई लाइफ
माई लाइफ
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अकेले में बैठ कर मैं अपने बारे में सोच रहा हूं,
आईने में देख कर हर बार अपने आप को टोक रहा हूं।
क्या बनकर आया था , क्या बनना चाहता हूं।
यही सोच कर मैं अपने आप को उपर वाले को सौप रहा हूं।
नहीं चाहता किसी को दुख पहुंचाना....
इसलिए अपने आप को अपने अंदर घोट रहा हूं।
आया था मां की गोद में लड़की बनकर ...
पर आईने में देख कर हर बार अपने आप को टोक रहा हूं।
हां मैं अपने आप के बारे में सोच रहा हूं।
