बरखा बहार....
बरखा बहार....
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फिर बरखा बहार आई
रुत ये सुहानी छाई
उपवन में आई हरियाली
चेहरों में छाई खुशहाली
लगने लगेंगे मेले
सावन में सजेंगे झूले।
रिमझिम सी बारिश आई
पहली फुहार दिल में छाई
मौसम आया सुहाना
सबको लगने लगा लुभाना
मन में कई उमंगे लाई
मौसम सुहानी सबको भाई।
बूंदों की तरास का
मन में मिठास सा
घनघोर बादल काले
मन में मिठास घोले
कल कल बहते झरने
मन को लगे भरने।
खालिहान है हरे
पोखर है भरे
आंखों में खुशियां लाई
मन में उमंगे पाई
बुझती प्यास धारा की
खुशियां है जीवन की।
फिर बरखा बहार आई
रुत ये सुहानी छाई
उपवन में आई हरियाली
चेहरों में छाई खुशहाली
लगने लगेंगे मेले
सावन में सजेंगे झूले।
