STORYMIRROR

Gyanveda

Others

4  

Gyanveda

Others

बरखा बहार....

बरखा बहार....

1 min
206

फिर बरखा बहार आई

रुत ये सुहानी छाई

उपवन में आई हरियाली

चेहरों में छाई खुशहाली

लगने लगेंगे मेले 

सावन में सजेंगे झूले।


रिमझिम सी बारिश आई

पहली फुहार दिल में छाई

मौसम आया सुहाना 

सबको लगने लगा लुभाना

मन में कई उमंगे लाई

मौसम सुहानी सबको भाई।


बूंदों की तरास का

मन में मिठास सा

घनघोर बादल काले

मन में मिठास घोले

कल कल बहते झरने

मन को लगे भरने।


खालिहान है हरे 

पोखर है भरे

आंखों में खुशियां लाई

मन में उमंगे पाई

बुझती प्यास धारा की 

खुशियां है जीवन की।


फिर बरखा बहार आई

रुत ये सुहानी छाई

उपवन में आई हरियाली

चेहरों में छाई खुशहाली

लगने लगेंगे मेले 

सावन में सजेंगे झूले।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन