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Rukhsar parveen

Children Stories

3  

Rukhsar parveen

Children Stories

3#बाल_कहानी - #ईर्ष्यालु_मुनिया-----------------

3#बाल_कहानी - #ईर्ष्यालु_मुनिया-----------------

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रानी और मुनिया दोनों बहनें थी।रानी बहुत ईमानदार और प्रतिभाशाली लड़की थी। वह हमेशा लोगों की मदद करने को तैयार रहती। उसके अच्छे स्वभाव के कारण सभी लोग उससे बहुत प्यार करते थे। जबकि मुनिया बहुत गुस्सैल और नकचढ़ी लड़की थी। बुरे स्वभाव के कारण सभी उससे दूर-दूर रहते।

 मुनिया मन ही मन रानी से ईर्ष्या करने लगी। मुनिया सबका ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए रानी की नकल उतारने लगी। उसकी तरह कपड़े पहनती, बाल बनाती, लेकिन अपने बुरे स्वभाव के कारण वह रानी की तरह नहीं बन पा रही थी। रानी हर बार अपने काम से और स्वभाव से लोगों का दिल जीत लेती। मुनिया को ये सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था।

वह कुछ ऐसा करने की सोचने लगी, जिससे वह सबकी नजर में अच्छी बन जाये और रानी बुरी। 

एक दिन मुनिया ने रानी पर झूठा आरोप लगाया कि रानी ने मेरी गुड़िया चुरा ली है। मुनिया ने चुपके से गुड़िया रानी के बैग में रख दी थी। "माँ! देखो, इसने मेरी गुड़िया चुरा ली है।" मुनिया रानी पर चिल्लायी।

रानी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुनिया ऐसा क्यों कर रही है। माँ ने जब गुड़िया रानी के बैग में देखा तो उनको भी बहुत हैरत हुई। उन्होंने रानी को डाँट लगायी।

ये देख मुनिया मन मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। अब मुनिया अक्सर कोई न कोई सामान गायब कर देती और रानी का नाम लगा देती ।

रानी अब बहुत दुखी रहने लगी थी। रानी को दुखी देख मुनिया बहुत खुश होती।

माँ को मुनिया पर शक हुआ। एक दिन वह छिपकर मुनिया को देख रही थी। वह रानी के बैग में कुछ छिपा रही थी।

माँ को ये देखकर बहुत गुस्सा आया। उन्होंने मुनिया को रंगे हाथों पकड़ लिया था। मुनिया को बहुत डाँट लगायी और रानी से माफी माँगने के लिए कहा। 

मुनिया ने माँ के कहने से रानी से माफी माँग तो ली लेकिन उसका मन अभी भी नहीं साफ था।

माँ ने एक दिन उसको प्यार से समझाया कि, "बेटा! किसी से जबरदस्ती तुम प्यार नहीं पा सकती। उसके लिए तुमको अपने स्वभाव को बदलना पड़ेगा। तुमको लोगों की मदद करनी पड़ेगी। जीवन में सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलना पड़ेगा। जब तुम्हारी अच्छाई लोगों को पता चलेगी तो अपने आप लोग तुमसे प्यार करने लगेंगे। इसके लिए तुमको किसी से भी ईर्ष्या करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।"

मुनिया को माँ की बात समझ में आयी। उसने अपने स्वभाव को बदलने की कोशिश की। अपने गुस्से को काबू में किया और लोगों की मदद करने लगी। अब मुनिया को भी सब प्यार करने लगे।


#संस्कार_सन्देश - 

हमें कभी किसी से ईर्ष्या नहीं चाहिए, बल्कि हमेशा अपने अच्छे आचरण से लोगों का दिल जीतना चाहिए।



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