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हवाएँ
खुद दीपक बन
कब-तक
तृष्णा जननी
वही निवारण
श्रावण
नौव नौरता दसवां दशहरावा
जलना
सीतासी
एक बार
छेड़छाड़
होगा रूष्ट
शोषण
चैन की नींद
जिसका दुख
रूखसतहोगाकोईतोरोएंगेयेजिस्मोजां/आआकेमिलकेजाएंवो-/होगातभीजन्नतेजहां
किरणें
ही पर्यावरण
कर-कर
प्रकृति का नियम हैं इच्छाशक्ति
Hindi
उदाहरण
Quotes
सूर्य की किरणें संदेश यही दे रही,दूसरों के लिए एक उदाहरण बनो ...
हर दशहरे पर रावण तो जलता है पर सीता का हरण अब तक बंद नहीं हु ...
तृष्णा जननी जीवन के हर दुख की, जिसका दुख करता है वही निवारण ...
रविवार: जब-जब होगा प्रकृति का हरण, तब-तब होगा रूष्ट ही पर्य ...
मंगलवार: कब-तक प्रकृति का ऐसे शोषण होगा, ऐसे ही छेड़-छाड़ कर ...
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