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कुदरत धुंध फंसे जब अधर्म यारों को तन्हा प्रेमहिईश्वरहै हैं आता भी नृत्य चादँ दूर-दूर आसमान जल्दी से आत्म उत्थान उखाड़ते हम एक प्याली रात को करती हो जुल्म प्रकट

Hindi जब-जब Quotes