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ज़िन्दगी थी...

ज़िन्दगी थी ये हसरत से अनजान दिल कब नफरत से कैद हो गए कल जो खुशियों की आंसू दे जाते थे आज खंजर से घायल खून लगते हैं .....

By somya mohanty
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