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स्वार्थी...

स्वार्थी नहीं परमार्थी बनें। स्व-हित नहीं सर्व-हित का विचार करना प्रारम्भ करें। स्व-हिताय से आपका सम्भवतः क्षणिक कल्याण हो सर्व-हिताय से स्थायी कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो पाएगा।।

By Bharat Bhushan Pathak
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